Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on May 05, 2013 - 16:00:04 PM


Title - Black Marketing Of Railway Ticket : Inextlive
Posted by : riteshexpert on May 05, 2013 - 16:00:04 PM

Jamshedpur: विशाल को अर्जेंटली बंगलुरु जाना है. टिकट काउंटर से लेकर आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर टिकट के लिए कोशिश कर ली, पर सीट नहीं मिली. आखिरकार एक फ्रेंड की सलाह पर उसने एक टिकट एजेंट से कॉन्टेक्ट किया और कुछ ही घंटों में कंफर्म टिकट हाथ में आ गया. लेकिन हां विशाल के हाथ में आई इस टिकट के लिए उसे फेयर से चार सौ रुपए ज्यादा चुकाने पड़े.

 दलालों के लिए है कई मौके यह का कोई पहला मामला नहीं है. सिटी में सैकड़ों ऐसे मामले देखने को मिलते हैं. रेलवे द्वारा टिकट की ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम लगाने के लिए बनाए जा रहे तरह-तरह के रूल्स के बावजूद सिटी में टिकट दलालों का खेल धड़ल्ले से जारी है. आम लोगों के साथ-साथ इस ब्लैक मार्केटिंग का शिकार दूसरे शहरों में रहकर स्टडी करने वाले स्टूडेंट्स को भी भुगतना पड़ रहा है. टाटानगर से होने वाली पैसेंजर्स की भीड़ और यहां से चलने वाली ट्रेन्स की बड़ी संख्या रेलवे के लिए तो फायदेमंद है ही साथ ही टिकट दलालों के लिए भी ब्लैक मार्केटिंग के कई रास्ते खुलते हैं. टाटानगर से डेली करीब 3620 टिकट इश्यू किए जाते हैं. जनवरी से लेकर मार्च तक बुकिंग काउंटर और ऑनलाइन बुकिंग के जरिए करीब 3 लाख से ज्यादा टिकट इश्यू किए हैं. इन टिकट्स के जरिए डेली एवरेज 13 लाख से ज्यादा की अर्निंग होती है. टिकट के जरिए पिछले तीन महीनों के दौरान होने वाली आमदनी पर नजर डालें तो आंकड़ा 10 करोड़ से ज्यादा का है. टिकट की इस बड़ी डिमांड को देखते हुए दलाल लोगों की जरूरत का जमकर फायदा उठाते हैं. दलाल धड़ल्ले से कर रहे काम

सिटी में टिकट दलाल धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं. ये दलाल लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर पैसेंजर्स से अच्छी-खासी रकम वसूलते हैं. एक टूर एंड ट्रेवल्स संचालक ने बताया कि दलाल लोगों से कंफर्म टिकट देने के लिए लोगों की जरूरत के हिसाब से प्रति टिकट हजार रुपए तक ज्यादा लेते हैं. ये दलाल स्टेशन के आस-पास पैसेंजर्स की तलाश में रहते हैं. टिकट दलालों की नजरें बिजी रूट्स पर रहती हैं. आमतौर पर सिटी से नई दिल्ली, बंगलोर, भुवनेश्वर, चेन्नई जैसी सिटीज के लिए पैसेंजर्स की काफी भीड़ रहती है. दलाल इन पैसेंजर्स की पहचान कर उन्हें कंफर्म टिकट देने के लिए अच्छी खासी रकम वसूलते हैं. Student बनते हैं निशाना बंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही स्नेहा के लिए छुïिट्टयों में घर आने के बाद वापस लौटना हर बार एक प्रॉब्लम बनता है. अगर पहले से रिटर्निंग टिकट ना हो तो फिर एजेंट से टिकट लेने के अलावा कोई भी रास्ता नहीं बचता. दूसरे शहरों में रहकर स्टडी करने वाले स्टूडेंट अक्सर इन दलालों का शिकार बनते हैं. बंगलुरु, चेन्नई, भुवनेश्वर, पुणे, दिल्ली जैसी सिटी में स्टडी कर रहे स्टूडेंट्स को घर आने के बाद अक्सर वापस कॉलेज जाने की जल्दी होती है. रिटर्निंग टिकट के लिए उन्हें अक्सर दलालों का सहारा लेना पड़ता है. में इन टिकटों को ब्लैक में बेच दिया जाता है.

'टिकट दलालों पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. कुछ ही दिनों पहले एक एजेंट का पकड़ा गया था. फिलहाल स्टेशन पर इस तरह के एजेंट्स के एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है. सिटी एरिया में भी इस पर लगाम लगाने के लिए छापेमारी की जा रही है.'

-डी शर्मा, इंचार्ज, आरपीएफ, टाटानगर 'टाटानगर से लगभग हर ट्रेन का कोटा है. बुकिंग ओपन होने के साथ हर कोटे में टिकट काटे जाते है.' एन गणेश, चीफ टिकट सुपरवाइजर टाटानगर 'रजर्वेशन को लेकर अक्सर प्रॉब्लम होती है. कई बार तत्काल में भी टिकट नहीं मिलता पर वही दलाल कभी भी कंफर्म टिकट अवेलेबल करा देते हैं. लेकिन हां इसके लिए जेब तो ढीली करनी पड़ती ही है.'

-आशीष प्रियदर्शी, स्टूडेंट