Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Jul 06, 2013 - 09:00:49 AM


Title - railway plateform, problem, dirty.ranchi, jharkhand - PICS : ऐसी पटरियों पर चलती हैं ट्रेनें, कभी भी
Posted by : riteshexpert on Jul 06, 2013 - 09:00:49 AM

रांची. प्लेटफॉर्म नंबर एक चकाचक। और, दो गंदा एवं खतरनाक। गंदा तो ठीक। पर, खतरनाक ऐसे कि कोई आम आदमी भी गौर से पटरियों को देखे तो समझ जाए, ये तो खतरनाक हैं। नहीं तो दी गईं फोटो देखिए। ये दुर्घटना को दावत है या इंतजार, ये तो रेलवे वाले जानें।

 
क्योंकि, उन्हें तो इंतजार है फंड का। कहते हैं कि जैसे एक नंबर ठीक किया, वैसे ही इसे भी करेंगे। बस फंड आ जाए। मतलब तब तक यहां गुजरने वाली गाड़ियों से सफर करने वाले हजारों यात्री भगवान भरोसे। शायद, उन्हें बेंड से टेढ़ी-मेढ़ी, ऊंची-नीची हुई पटरियां और इसका कारण सड़े हुए लकड़ी के स्लीपरों की भयावह स्थिति ठीक से दिख नहीं रही।

डीआरएम को फंड का इंतजार

50 के करीब गुजरती हैं प्रतिदिन दो नंबर प्लेटफॉर्म से ट्रेनें

25साल होती है कंक्रीट के स्लीपर की उम्र, जो लगने चाहिए

08 साल से ज्यादा नहीं चलते हैं लकड़ी के स्लीपर जो लगे हैं

ऐसा क्यों हुआ?

इसका कारण है लकड़ी के सड़ते स्लीपर (कुंदे)। लगातार बारिश और जंग से ऐसा हुआ। इनके सड़ने से पटरियों पर इनकी पकड़ ढीली हो गई। और, जब ट्रेनें गुजरीं तो दबाव से पटरियां टेढ़ी-मेढ़ी और ऊंची-नीची हो गईं। इसका एक कारण यह भी है कि इनकी वर्षो से मरम्मत नहीं हुई है। उधर, चूंकि, लकड़ी के स्लीपर सड़-गल चुके हैं और बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, इसलिए इस प्लेटफॉर्म की सफाई भी नहीं हो पाती।

लापरवाही की इंतहा

प्लेटफॉर्म नंबर दो की पटरियों को चार साल पहले 2009 में ही बदलना था। लेकिन, रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम अब तक टलता ही जा रहा है। यह तब, जबकि पूरे मंडल में रांची छोड़कर कहीं भी लकड़ी के स्लीपर पर पटरियां नहीं हैं।

हमारी नजर में है, जल्द काम होगा

प्लेटफॉर्म नंबर दो का काम हमारी नजर में है। इसकी पटरियां भी बदली जाएंगी। हाल ही में प्लेटफॉर्म नंबर एक की पटरियों को बदला गया था और इसके लिए सीमेंटेड प्लेटफॉर्म बनाकर कंक्रीट के स्लीपर भी लगाए गए हैं। दो के लिए भी ऐसी ही योजना है, लेकिन फिलहाल तो फंड का इंतजार है। जैसे मंडल में फंड आएगा, इस काम को भी कराया जाएगा।’

गजानन मल्लया, डीआरएम, रांची रेल मंडल

सबसे व्यस्त, सबसे उपेक्षित क्यों?

प्लेटफॉर्म नंबर दो पर सबसे अधिक गाड़ियां आती हैं। इनमें मालगाड़ियों समेत, डाउन की गाड़ियां शामिल हैं। इनमें करीब 20 आकर रुकने वाली और इतनी ही खुलने वाली। लेकिन, प्लेटफॉर्म एक, तीन, चार और पांच की पटरियां कंक्रीट के स्लीपर हैं, जबकि दो की लकड़ी के स्लीपर पर।