Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Feb 17, 2013 - 00:00:42 AM


Title - इलाहाबाद जंक्शन पर ‘कर्फ्यू’
Posted by : riteshexpert on Feb 17, 2013 - 00:00:42 AM

इलाहाबाद। जंक्शन के आधे हिस्से में
शुक्रवार को दिनभर कर्फ्यू जैसा माहौल
रहा। सिविल लाइंस साइड सरकुलेटिंग
एरिया से एक भी यात्री को स्टेशन
परिसर में प्रवेश नहीं मिला।
सख्ती का आलम यह रहा कि अफसर और
कर्मचारी भी बैरंग लौटा दिए गए।
बिजली घर और महात्मा गांधी मार्ग से
नवाब यूसुफ रोड तक पहुंचना जंग जीतने से
कम नहीं रहा। सिटी साइड से
भी प्लेटफार्म पर
वही स्नानार्थी पहुंचा जिसे रेलवे ने
इजाजत दी। इसके कारण सात-आठ और
नौ-10 नंबर प्लेटफार्म पर सामान्य
दिनों से भी कम यात्री नजर आए। फुटओवर
ब्रिजों पर यात्रियों से
ज्यादा सुरक्षाकर्मी चहलकदमी करते हुए
दिखे।
मौनी अमावस्या पर भगदड़ के बाद
सक्रिय हुए रेलवे ने वसंत पंचमी के
श्रद्धालुओं की सुविधा को दरकिनार कर
दिया। उसकी कोशिश रही कि रेलवे
स्टेशन को पूरी तरह सील कर ऐसा इंतजाम
किया जाए कि उसकी मर्जी के बिना एक
भी यात्री परिसर में दाखिल न हो सके।
रेलवे प्रशासन ने यह व्यवस्था लागू करने के
लिए पूरी ताकत झोंक दी। नतीजतन,
स्टेशन पर आम
यात्रियों का पहुंचना ही मुश्किल
हो गया। सिविल लाइंस साइड के
सरकुलेटिंग एरिया में कुछ रेलवे
कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों के
सिवा पूरे दिन कोई नजर नहीं आया।
इक्का-दुक्का ऐसे यात्री दिखे जिन्हें
स्टेशन परिसर से बाहर निकलना था।
नवाब यूसुफ रोड से स्टेशन के इंट्री प्वाइंट
पर पहुंचे यात्रियों को पूरे तीन
किमी का चक्कर काटकर जाना पड़ा।
दिक्कत यहीं तक नहीं रही। सिटी साइड
में भी रेस्ट हाउस के रास्ते से प्रवेश बंद
रहा। पांच नंबर गेट से सिर्फ उन्हें
ही प्रवेश की इजाजत दी गई जिनके पास
आरक्षित टिकट था। जनरल टिकट वाले
आम यात्रियों को भी बाड़े में डाल
दिया गया। इससे कइयों की ट्रेन भी छूट
गई। बाड़े से सिर्फ उन्हीं प्लेटफार्मों पर
जाने का रास्ता दिया गया, जहां रेलवे ले
जाना चाहता था। नाकेबंदी के कारण
नियमित ट्रेनों के यात्री कम दिखाई
दिए। प्लेटफार्म सात, आठ, नौ और 10
गिनती के ही यात्री रहे। स्पेशल ट्रेनों के
रवाना होने के बाद दूसरे प्लेटफार्मों पर
भी यही स्थिति रही।
‘महाकुंभ के लिए बनाई गई
योजना को जिला और पुलिस प्रशासन के
साथ मिलकर व्यवस्थित तरीके से लागू
किया गया। सिविल लाइंस एरिया से
प्रवेश प्रतिबंधित रहा।’ संदीप माथुर,
सीपीआरओ, एनसीआर