Indian Railways News => Topic started by puneetmafia on May 13, 2012 - 15:00:18 PM


Title - एसी डिब्बों में मिल रही हैं फटी व मैली बेडशीट
Posted by : puneetmafia on May 13, 2012 - 15:00:18 PM

उदयपुर से चलने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के वातानुकूलित डिब्बों में कॉकरोचों व चूहों की धमा चौकड़ी से यात्री परेशान हैं। यही नहीं एसी फस्र्ट में मंत्री तथा उच्चाधिकारियों को भी इस परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है।



यहां से चलने वाली खजूराहो एक्सप्रेस और दिल्ली जाने वाली मेवाड़ एक्सप्रेस के एसी फस्र्ट व एसी सेकंड क्लास के फ्रिक्वेंट ट्रेवलर्स का कहना है कि बर्थ की दराजों में या मेगजीन बास्केट में कॉकरोच छिपे रहते हैं। रात्रि में लाइट ऑफ होते ही वे बर्थ पर सोए यात्रियों पर चढ़ जाते हैं। एसी फस्र्ट के कूपे में चूहे भी दिखाई देते हैं।


फटे व मैले बिस्तर की सप्लाई :रेलवे के सभी वातानुकूलित श्रेणी के यात्रियों को ओढ़ने व बिछाने की चादर, कंबल, तकिया व नेपकिन ट्रेन में मुहैया कराने का प्रावधान है। इस नियम की पालना भी हो रही है लेकिन बिस्तरों की धुलाई ठीक से न होने से यात्रियों में असंतोष है। स्वास्थ्य को लेकर सजगता बरतने वाले यात्री रेलवे सप्लाई के बिस्तर इस्तेमाल करने से कतराने लगे हैं। एसी थर्ड के यात्रियों को दी जाने वाली सफेद रंग की कई चादरें फटी हैं। एसी फस्र्ट में सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक या उच्चाधिकारी भी सफर करते हैं।


अटेंडेंट के पास स्प्रे भी नहीं

कॉकरोच या चूहों को भगाने के लिए वातानुकूलित डिब्बों में कंडक्टर व अटेंडेंट के पास कॉकरोच मारने वाला स्प्रे उपलब्ध नहीं होता है। ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक डिब्बों में सफाई नहीं होती है। खजूराहो एक्सप्रेस का आखिरी स्टेशन खजूराहो जंक्शन पर वापस लौटने वाले रैक की सफाई नहीं की जाती।



मेवाड़ एक्सप्रेस का गंतव्य हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर डिब्बों में सफाई किए बगैर रैक पार्किग के लिए यार्ड में भेज दिया जाता है। शाम को ट्रेन वापसी के समय यार्ड से रैक लाकर प्लेटफार्म पर लगा दिया जाता है। मुंबई जाने वाली ट्रेन अपने गंतव्य बांद्रा स्टेशन पर 15 मिनट ठहराव के बाद वापस उदयपुर लौट जाती है, जिससे डिब्बों की सफाई नहीं हो पाती है। सभी गाड़ियों के रैक की मेनुअल तथा मैकेनाइज्ड धुलाई उदयपुर सिटी स्टेशन के पिट लाइन यार्ड में होती है।


कंडक्टर इसलिए हैं बेबस

वातानुकूलित डिब्बों में रहने वाले कोच कंडक्टर के पास शिकायत पुस्तिका उपलब्ध नहीं होती है। शिकायत पुस्तिका ट्रेन गार्ड या स्टेशन मास्टर के पास होती है, जहां जाकर चूहे, कॉकरोच की शिकायत या फटे, मैले बिस्तर की शिकायत लिखना यात्रियों के लिए मुश्किल होता है। ट्रेन में बिस्तर सप्लाई करने वाला ठेकेदार नहीं होता है। ठेकेदार के कम पढ़े-लिखे नौकर रहते हैं जो यात्रियों को संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाते हैं।

महाप्रबंधक को शिकायत करने पर भी सुधार नहीं


उत्तर पश्चिम रेलवे जोनल सलाहकार समिति के सदस्य एम.एस. खमेसरा ने बताया कि जून 2011 में जयपुर में हुई बैठक में उदयपुर से चलने वाली ट्रेनों के वातानुकूलित श्रेणी के डिब्बों में कॉकरोच व चूहे पनपने की शिकायत की थी। रेलवे के स्वास्थ्य अधिकारी ने पेस्ट कंट्रोल सिस्टम से नियंत्रण करने का आश्वासन दिया था। खमेसरा का कहना है कि यात्रियों द्वारा इस्तेमाल की जाने बेड शीट्स की धुलाई वॉशिंग पाउडर से न कर सादा पानी से निचोड़ दी जाती है, जिससे मैल साफ नहीं हो पाता है। वे इसकी शिकायत अगली जोनल सलाहकार समिति की बैठक में करेंगे।