Indian Railways News => Topic started by greatindian on Apr 24, 2013 - 00:00:03 AM


Title - टिकट मिला, तब तक खुल गयी ट्रेन
Posted by : greatindian on Apr 24, 2013 - 00:00:03 AM

काफी मशक्कत के बाद सैयद अली को टिकट तो मिल गया, लेकिन जब टिकट हाथ में आया, तब तक ट्रेन खुल चुकी थी. वह जंकशन पर ही छूट गये. उन्हें गया अपने पिता के पास एक जरूरी काम से जाना था. यह समस्या सिर्फ एक सैयद अली की नहीं थी, बल्कि इनके जैसे कई यात्री थे, जिनके प्लेटफॉर्म तक पहुंचते-पहुंचते ट्रेन खुल चुकी थी.या फिर टिकट के लिए लाइन में खड़े रहने के दौरान ही ट्रेन जा चुकी थी. पटना जंकशन के अनारक्षित टिकट काउंटर से टिकट लेने के लिए यात्रियों को जंग के मैदान की तरह जूझना पड़ता है. यात्री लंबी लाइन में लग कर टिकट लेने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं और जब टिकट मिल जाये, तो ट्रेन पकड़ने के लिए प्लेटफॉर्म पर दौड़ लगानी पड़ती है.
इस दौड़ में हर दिन यात्रियों की ट्रेन छूटती है. प्रभात खबर ने सोमवार की सुबह पांच से छह बजे तक काउंटरों का जायजा लिया. इस दौरान जंकशन के 22 काउंटरों (करबिगहिया मिला कर) में 13 बंद थे. खुले काउंटरों पर यात्रियों की लंबी कतारें थीं, तो दूसरी ओर कई काउंटरों पर ‘बंद’ का बोर्ड लगा था.
सुबह में एक दर्जन ट्रेनें
जंकशन से सुबह पांच से सात बजे के बीच करीब एक दर्जन ट्रेनें खुलती या गुजरती हैं. कम काउंटर खुले होने से यात्रियों की काफी भीड़ रहती है. कई यात्री समय पर टिकट नहीं कटा पाते हैं. जो कटा पाते हैं, उनमें भी कई की ट्रेन छूट जाती है.
हर दिन 70 हजार यात्री
यहां से अनारक्षित टिकट कटा हर दिन औसतन 70 हजार यात्री यात्र करते हैं. पांच वर्ष पहले भी यहां टिकट काउंटरों की संख्या 22 थी, आज भी है.