Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Jun 12, 2013 - 09:01:20 AM


Title - ट्रेन का इंतजार, टिकट के लिए मार
Posted by : RailXpert on Jun 12, 2013 - 09:01:20 AM

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : 'इंतजार' रेल यात्रियों की नियति बन गई है। टिकट के लिए इंतजार। किसी तरह टिकट मिल गया तो ट्रेन के लिए इंतजार। ट्रेन मिल गई तो सीट के लिए इंतजार। अगर सीट भी मिल गई तो सुविधाओं का इंतजार। भीड़ का आलम यह है कि ट्रेन ही नहीं स्टेशन के प्लेटफार्म पर भी तिल रखने की जगह नहीं है। यात्री परेशान हैं, कोई पुरसाहाल नहीं।
एक तो कंफर्म आरक्षित टिकट नहीं मिल रहा, ऊपर से बेतहाशा भीड़ कोढ़ में खाज का काम कर रही। प्लेटफार्म पर जगह नहीं मिल रही है तो यात्री जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पर ही लंबी लाइन लगा दे रहे हैं। इसके बाद भी सीट नहीं मिल पा रही। सीट पाने के चक्कर में कई चोटिल भी हो जा रहे हैं। स्टेशन पर लाइन लगाने में ही लोगों के कई दिन गुजर जा रहे हैं। टिकट निरस्तीकरण के लिए भी लोग परेशान हो रहे हैं।
सुबह से लगे रहे लाइन में
सोमवार को गोरखधाम में जगह नहीं मिली तो परिवार के साथ धर्मदेव को दूसरे दिन मंगलवार को भी लाइन लगानी पड़ी। उनका कहना था कि टिकट के लिए सुबह से लाइन में लगे थे तो किसी तरह मिला। फिर ट्रेन के लिए लाइन लगाई तो जगह ही नहीं मिल सकी। अकेले रहता तो किसी तरह चला भी जाता।
टिकट तो मिला ट्रेन में चढ़ेंगे कैसे
कुशीनगर एक्सप्रेस में सीट के लिए घंटो लाइन में खड़े चौरीचौरा के रामभजन परेशान थे। उदास मन से बोले, किसी तरह टिकट तो मिल गया है, अब ट्रेन में कैसे चढ़ेंगे यह सोचकर ही पसीना छूट जा रहा है। उनके पीछे ही मां की गोद में बैठी गुड़ियां रो रही थी। मां लाइन से बाहर नहीं निकल रही थी कि फिर पीछे हो जाएंगे।
बुजुर्गो व महिलाओं को अधिक दिक्कत
सबसे अधिक परेशानी बच्चे, महिला और बुजुर्गो को हो रही है। टिकट और ट्रेन के लिए उन्हें घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है।
सुरक्षा बल के भी छूटे पसीने
बांद्रा, गोरखधाम, वैशाली और कुशीनगर एक्सप्रेस पकड़ने में स्टेशन पर अफरा-तफरी मची रही। यात्रियों को लाइन में लगाने में सुरक्षा बल के भी पसीने छूट गए। हालांकि, यात्रियों का कहना था कि कुली और सुरक्षा बल के कुछ जवान 100 से 200 रुपये लेकर सीट भी दिला रहे हैं।
एनईआर ने बनाया
कमाई का रिकार्ड
पहली जून से ही यात्रियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। सिर्फ यूटीएस (अन रिजवर्ड टिकट सिस्टम) से प्रतिदिन 40 हजार से अधिक यात्री टिकट ले रहे हैं। शनिवार को तो लगभग 44 हजार यात्रियों ने टिकट लिया और रेलवे को करीब 74 लाख रुपये की कमाई हुई। बता दें कि गोरखपुर यूटीएस से औसत प्रतिदिन 30 हजार यात्री टिकट लेते हैं, जबकि 28 लाख रुपये की आमदनी होती है।
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गोरखपुर होते हुए जाएगी सहरसा-सहारनपुर स्पेशल
भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने 05211/05212 सहरसा-सहारनपुर-सहरसा अनारक्षित समर स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह गाड़ी गोरखपुर होते हुए चलाई जाएगी। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी आलोक कुमार सिंह के अनुसार 05211 एक्सप्रेस 9 और 10 को चल चुकी है। यह गाड़ी दूसरे दिन सुबह 7.20 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। 12 व 13 को भी रात 8.05 बजे से सहरसा से चलेगी। 05212 सहारनपुर से 11, 12, 15 व 16 जून को दिन के 2 बजे से चलाई जाएगी। यह गाड़ी दूसरे दिन सुबह 4.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी।
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लगेंगे अतिरिक्त कोच
15007 कृषक एक्सप्रेस में 11 जून को मंडुआडीह से, 15028 मौर्या एक्सप्रेस में 12 को गोरखपुर से तथा 15027 मौर्या में 13 को हटिया से, 12589 गोरखपुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में 12 को गोरखपुर से तथा 12590 सिकंदराबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस में 14 को सिकंदराबाद से शयनयान श्रेणी के एक-एक अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
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11 से 6 तक मार्ग बदलकर
चलेगी गोरखपुर-एलटीटी
पश्चिम रेलवे के भोपाल- बीना रेलखंड के बीच नान इंटरलाकिंग के चलते 12541/12542 गोरखपुर-एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस 11 जून से 6 जुलाई तक मार्ग बदलकर चलेगी। सीपीआरओ के अनुसार यह गाड़ी कानपुर सेंट्रल-झांसी-बीना-इटारसी की जगह कानपुर सेंट्रल-बांदा-ओहन-सतना-जबलपुर-इटारसी होते हुए चलेगी।
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पानी के लिए
भी मारामारी
स्टेशन पर पानी के लिए भी मारामारी है। रेलवे प्रशासन ने 'रेल नीर' बेचने का फरमान जारी किया है। उसका कहना है कि उसकी अनुपलब्धता पर ही वेंडर अन्य निर्धारित पानी की बोतल बेच सकतेहैं। पर, स्टालों पर रेल नीर नहींमिल रहा। वेंडर कहते हैं कि ठंडा नहीं है और दूसरी पानी की बोतल पकड़ा दे रहे हैं। यही नहीं अनुपलब्धता की भी शिकायत करते हैं। मजबूरी में यात्री को अन्य पानी की बोतल लेनी पड़ रही है। वहीं रेलवे का कहना है कि रेल नीरपर्याप्त मात्रा में स्टेशन पर मौजूद है।