Indian Railways News => Topic started by railenquiry on Jun 04, 2013 - 15:00:29 PM


Title - ट्रेन में सीट के लिए 'मैराथन'
Posted by : railenquiry on Jun 04, 2013 - 15:00:29 PM

गर्मियों में जहां लंबी दूरी की ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है, वहीं दूसरी तरफ लोकल ट्रेनों में भी भीड़ बढ़ने लगी है। स्कूलों में छुट्टियों के बाद लोकल ट्रेनों में भीड़ बढ़ने लगी है। खास तौर पर अमृतसर से पठानकोट व अमृतसर से डेरा बाबा नानक की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ है। महिलाएं, बुजुर्ग व बच्चों को ट्रेन में सीट पाने के लिए 'मैराथन' दौड़ की तरह दौड़ लगानी पड़ती है।
भागो..ट्रेन आ गई
जैसे ही पठानकोट जाने वाली ट्रेन के आने की घोषणा हुई। रेलवे स्टेशन पर हडकंप मच गया। बच्चा, बड़ा, बूढ़ा, महिलाएं सब दौड़ पड़ीं।सभी ट्रेन में जगह पाने के लिए जद्दोजहद करते दिख रहे थे। महिलाएं, लड़कियां धक्का-मुक्की से परेशान दिखीं।
भीड़ अधिक, डिब्बे कम
ट्रेन में कुल सात डिब्बे, सैकड़ों लोगों की भीड़। हर मुसाफिर की इच्छा कि वह ट्रेन में सीट पाने में कामयाब हो जाए। कोई कायदा-कानून नहीं। ट्रेन में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की। महिलाएं बच्चों को गोद में उठाए भारी भीड़ में ट्रेन में चढ़ने के प्रयास में। इतना सब कुछ होने के बावजूद कोई पुलिस वाला नहीं दिख रहा था।
ट्रेन के अंदर भी खड़ा रहना मुश्किल
ट्रेन के अंदर भी पैर रखने की मुश्किल से जगह मिल पा रही थी। अधिकांश महिलाएं ट्रेन के डिब्बों में खड़ी थीं। छोटे बच्चों का गर्मी से बुरा हाल था। सीट पाने के लिए लालायित नजरें, लेकिन सीट तो फुल हो चुकी थी। अधिकांश लोग ट्रेन रूकने के पहले ही डिब्बों में सवार होकर सीटें अपनों के लिए आरक्षित कर लेते हैं।
पांच मिनट में डिब्बे फुल
पांच मिनट में ही सभी डिब्बों में पैर रखने की भी जगह नहीं बची।हरेक डिब्बों में भारी भीड़। उसके बावजूद लोग ट्रेन में चढ़ने के लिए जगह की तलाश करते हुए हर डिब्बों में नजर दौड़ा रहे थे। जहां भी जगह मिल जाती, वहीं पर लोग खड़े होने का प्रयास करते।
दूर की जाएंगी खामियां : डीआरएम
फिरोजपुर रेल डिवीजन के डीआरएम एनसी गोयल कहते हैं कि चूंकि डेरा बाबा नानक हो या पठानकोट, जालंधर व अन्य रुटों पर चलने वाली डीएमयू ट्रेनों में भीड़ का बड़ा कारण है बसों की तुलना में किराया काफी कम होना। गर्मियों की छुट्टियां स्कूलों में चल रही हैं, जिससे ट्रेनों में भीड़ खूब है। जो भी खामियां हैं, वह दूर की जाएंगी।