Indian Railways News => Topic started by railenquiry on May 30, 2013 - 20:00:09 PM


Title - दो साल में 200 की रफ्तार से दौड़ने लगेंगी दिल्ली-मुंबई के बीच ट्रेनें
Posted by : railenquiry on May 30, 2013 - 20:00:09 PM

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जापान के पीएम शिंजो अबे बुधवार को जब शिखर वार्ता के लिए बैठे तो भारतीयों के लिए उम्मीदों की रेल सरपट दौड़ पड़ी। जापान की ओर से तक नीक और आर्थिक मदद का भरोसा मिलने से संभव है कि अगले दो साल के अंदर मुंबई-दिल्ली के बीच 200 किमी/प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलने लगेंगी। हालांकि नई दिल्ली-चंडीगढ़ और मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन में सफर का सपना पूरा होने में कम से कम दस साल अभी और लग सकते हैं।
भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों के बीच बुधवार को हुई शिखर वार्ता में ऊर्जा, संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन जैसे गंभीर विषयों पर एक राय तो बनी ही, साथ ही देश में रेल के जरिए बड़े शहरों के बीच की दूरियां कम करने पर सहयोग का रास्ता भी खुल गया। जापान ने मुंबई मेट्रो लाइन-3 प्रोजेक्ट के लिए 71 अरब येन का कर्ज देकर अपनी प्राथमिकता की ओर भी इशारा कर दिया। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पहले चरण की प्रगति से उत्साहित जापानी पीएम ने दूसरे चरण के लिए 136 अरब डालर की मदद देने पर सहमति दे दी। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के लिए जापान मददगार बना रहेगा और डीएमआईसी डेवलेपमेंट कंपनी में जापानी बैंक 26 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगा। दो दिन से जापान सरकार के प्रतिनिधियों और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के बीच चल रही बातचीत का नतीजा भारत में विकास का चेहरा बदलने वाला माना जा सकता है। एक ओर बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय के लिए सड़क संपर्क बढ़ाने में जापानी मदद मिल गई तो दूसरी ओर आईआईटी-हैदराबाद के कैंपस डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए 17.7 अरब येन देने का ऐलान जापान ने कर दिया।
निवेशकों के लिए मनमोहन की तेजी!
बंगलूरू-चेन्नई औद्योगिक कॉरिडोर को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के मौके पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो ने मनमोहन सिंह से दक्षिण भारत के इस इलाके पर खास ध्यान देने को कहा। उनका इशारा था कि जापानी निवेशक चेन्नई के आसपास के इलाके में आधारभूत और निर्माण दोनों क्षेत्रों में रुचि दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने तुरंत ही साथ गए अफसरों से चेन्नई के आसपास इंडस्ट्रियल पार्क, सड़कें और बिजली जैसी जरूरतों को सुधारने का आदेश दे दिया। उन्होंने शिंजो को रीजन के लिए जापान की ओर से तैयार मास्टर प्लान के मुताबिक सुविधाएं जुटाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जिस ढंग से जताई, उससे निवेश आमंत्रित करने के लिए उनकी तैयारी और तेजी दोनों नजर आई।