Indian Railways News => Topic started by puneetmafia on May 16, 2013 - 09:00:03 AM


Title - रावघाट परियोजना की सुरक्षा पर रेलवे ने खड़े किए हाथ
Posted by : puneetmafia on May 16, 2013 - 09:00:03 AM

रायपुर [ब्यूरो]। स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड के लिए रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन बिछाने का काम छत्तीसगढ़ सरकार और रेलवे के बीच मचे घमासान से अधर में लटक गया है। केंद्रीय इस्पात मंत्रालय और इस्पात निर्माता कंपनियों के साथ हुई बैठक में रेलवे ने इस नई रेलवे लाइन की सुरक्षा व्यवस्था करने से यह कह कर इंकार कर दिया कि एमओयू के अनुसार रेलवे लाइन की सुरक्षा व्यवस्था का काम छत्तीसगढ़ सरकार को देखना है। वहीं सेल का कहना था कि रेलवे अपने कुल बजट में 250 से 400 करोड़ रुपए के सुरक्षा बजट को भी शामिल करे। हालांकि इस्पात मंत्रालय ने रेलवे से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में टाटा स्टील की परियोजना स्थापित करने के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु आवश्यक कार्रवाई तेज करने का आश्वासन दिया है। कुछ भावी स्टील परियोजनाएं केंद्र और राज्य के संबंधों के चलते उलझ कर रह गई हैं।
गौरतलब है कि सेल के भिलाई स्टील प्लांट को चालू रखने के लिए रावघाट रेल परियोजना का पूरा होना जरूरी है। इस परियोजना से प्लांट को शुरूआत में प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख टन और चार वर्ष बाद लगभग 9 लाख टन लौह अयस्क की प्राप्ति होगी। उधर टाटा स्टील द्वारा स्थापित की जाने वाली 5.5 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा सीमांकन का कार्य शीघ्र करने की सम्भावना है।
गौरतलब है कि टाटा स्टील और छत्तीसगढ़ सरकार ने 2005 में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया था, जिसके अंतर्गत टाटा स्टील को दो चरणों में एक नया कारखाना लगाना था। लेकिन उक्त परियोजना लगातार विलंबित होती चली गई। तब से लेकर अब तक सहमति ज्ञापन का कई बार नवीनीकरण हो चुका है और वर्तमान सहमति ज्ञापन की अवधि 2014 में समा होने जा रही है।
स्टील की बदौलत छत्तीसगढ़ की सूरत बदलने की कोशिश नियमों, कानूनों और केंद्र राज्य संबंधों के दांवपेंच में उलझ कर रह गई है। आलम यह है कि केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के साथ बैठक मेंजहां ओडिशा, कर्नाटक और झारखण्ड जैसे राज्यों के सचिव और विशेष सचिव भाग ले रहे हैं वहीं छत्तीसगढ़ की तरफ से प्रतिनिधित्व रेजिडेंट कमिश्नर को करना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य के बीच संबंधों का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वीजा स्टील द्वारा स्थापित किए जाने वाले 2.5 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा 2009 में कुर्वानघाट इलाके में लौह अयस्क की माइंस के लिए प्राथमिक लाइसेंस देने हेतु सिफारिश की गई थी। इस बात पर खनिज मंत्रालय ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि राज्य सरकार को किसी भी दरख्वास्त को अग्रेषित करने से पहले खनन मंत्रालय से यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अमुक कंपनी को खदान आवंटित करने को लेकर पहले से कोई मामला लंबित तो नहीं है।