Indian Railways News => Topic started by riteshexpert on Dec 02, 2012 - 15:00:25 PM


Title - रेलवे नहीं, ठेकेदारों की मौज
Posted by : riteshexpert on Dec 02, 2012 - 15:00:25 PM

झाँसी : जनता भोजन की ़कीमत बढ़ाने के ऊहापोह में फँसी रेलवे ने स्टेशन, प्लैटफॉर्म व ट्रेन में बिकने वाले अतिरिक्त आइटम के रूप में खाद्य व पेय पदार्थो की ़कीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे रेलवे को तो कोई खास फायदा हुआ नहीं, ठेकेदारों की पौ-बारह हो गई है।गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने खाने-पीने की सामग्री की ़कीमतें तो अक्टूबर में ही बढ़ा दी थीं, किन्तु इसका सर्कुलर हाल ही में आया है। दरअसल, रेलवे ने स्टेशन, प्लैटफॉर्म, ट्रेन, कैण्टीन आदि पर बिकने वाली खाने-पीने की सामग्री की दरें तय कर रखी हैं। इन दरों में लम्बे समय से संशोधन नहीं हुआ था। अधिकांश ठेकेदारों ने घाटे से बचने के लिए खाने-पीने की सामग्री की गुणवत्ता में कमी लानी शुरू कर दी। इससे रेलवे की छवि को धक्का लग रहा था। इधर, रेलवे ने ़कीमतों में बढ़ोत्तरी जिन खाद्य सामग्री पर की है, वह ऐसे अतिरिक्त आइटम हैं, जो अधिकांश ठेकेदारों द्वारा स्टेशन, प्लैटफॉर्म, ट्रेन में बेचे जाते हैं। बढ़ी ़कीमतों की सूची में विभागीय या आइआरसीटीसी की कैण्टीन में मिलने वाली खाने की थाली या जनता खाना शामिल नहीं है। इससे स्पष्ट है कि ़कीमतों में बढ़ोत्तरी का लाभ रेलवे को नहीं हुआ है। जो आप ट्रेन में खाएंगे तो वह स्टेशन या प्लैटफॉर्म के मुकाबले महँगा होगा। नई सूची में 97 आइटम शामिल हैं। इसमें शुगर फ्री 7 आइटम को भी स्थान दिया गया है।

बीच में बॉक्स

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नई रेट लिस्ट दाम रुपए में

सामान स्टेशन पर ट्रेन में

80 ग्राम ब्रेड पकोड़ा 22 24

दो समोसे 15 18

40 ग्राम कचौड़ी 10 12

125 ग्राम वेज सैनविच 18 20

एक वेज बर्गर 28 30

छोले भटूरे 31 36

इडली 12 14

मसाला बड़ा 16 18

मसाला डोसा 15 17

ब्रेड बटर/टोस्ट बटर (सेनविच ब्रेड)

12 14

पाव भाजी 32 34

2 आलू बण्डा 12 14

वेज सूप 15 18

राजमा चावल 30 35

कुलचे छोले 32 37

दाल-चावल 20 23

ऑमलेट 22 27

उबला अण्डा एक 9 11

रोटी 3 5

पराठा 5 7

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जनता खाना गायब

झाँसी : प्लैटफॉर्म पर 10 रुपए में गत्ते के पैक डिब्बे में मिलने वाला जनता खाना के रूप में सात पूरी, सब्जी, मिर्च का मिलना लगभग बन्द है। देखने-दिखाने को का़ग़जों में जनता खाने की खरीद-बिक्री चल रही है। यदि कोई यात्री माँगता है तो उसे ऐसे देखा जाता है, जैसे कि कोई अजूबा हो। झिड़की देकर यात्री को महँगा खाना खरीदने को मजबूर किया जाता है। यह स्थिति रेल अधिकारियों को इसलिए नहीं दिखाई देती, क्योंकि जब वह निरीक्षण करते हैं तो जनता खाना के डिब्बे दिखाई देने लगते हैं।