Indian Railways News => Topic started by railgenie on Feb 12, 2013 - 12:01:16 PM


Title - रेलवे ने नहीं लिया हादसे से सबक
Posted by : railgenie on Feb 12, 2013 - 12:01:16 PM

रेल प्रशासन ने रविवार को हुए हादसे से सबक नहीं सीखा। सोमवार को भी श्रद्धालुओं को स्पेशल ट्रेन के लिए लंबा इंतजार कराया गया। सरकुलेटिंग एरिया और प्लेटफार्मो पर श्रद्धालु ट्रेनों के बारे में जानने के लिए भटकते रहे। यहीं नहीं कुछ ट्रेनें स्टेशन पर घंटों खड़ी रहीं। ऐसा क्यों किया गया, जवाब देने वाला कोई नहीं था।रेलवे ने सोमवार को भी यात्री सुरक्षा और संरक्षा में ढिलाई बरती। जंक्शन पर रविवार की रात हुए हादसे की कोई शिकन अफसरों और रेल कर्मियों के माथे पर नहीं दिखाई दी। यहां के सारे प्लेटफार्म श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। हर कोई अपने घर लौटने के लिए बेताब था। बार-बार लोग पूछताछ केंद्र पर जाकर ट्रेनों के बारे में पता करते रहे लेकिन पुख्ता जानकारी देने वाला कोई नहीं था। श्रद्धालुओं का रेला कम नहीं हो रहा था। ट्रेनें लगाई तो गईं थीं लेकिन घंटों प्लेटफार्मो पर खड़ी रहीं। पूछने पर बताया गया कि भरने के बाद चलाई जाएंगी। प्लेटफार्मो पर पानी का इंतजाम नहीं था। यात्री प्यासे अपनी ट्रेन के इंतजार में बैठे रहे। रेल अफसर भी खामोश दिखाई दिए। उन्होंने आज भी स्पेशल ट्रेनों के संचालन में कोई तेजी नहीं दिखाई। कहने को तो रविवार रात 12 बजे से सोमवार को दोपहर 12 बजे तक कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया लेकिन प्लेटफार्मो पर डटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रेलवे के सारे दावों की कलई खोलने को काफी थी।

------

सिविल लाइंस से बंद रही एंट्री

सोमवार को एक बार फिर श्रद्धालुओं को पैदल चलाया गया। सिविल लाइंस की ओर से जंक्शन पर पहुंचने के लिए सारे रास्ते बंद कर दिए गए थे। कोई भी श्रद्धालु स्टेशन पर जाने की कोशिश करता तो उसे तैनात पुलिस कर्मी आगे बढ़ा देते। श्रद्धालुओं को पानी की टंकी तथा डीजल लोको शेड की ओर से स्टेशन के भीतर की ओर भेजा गया। वृद्ध और महिला श्रद्धालु बदइंतजामी से काफी परेशान रहे।

--------

..और गायब हो गए सुरक्षाकर्मी

नवाब यूसुफ रोड की ओर से स्टेशन पर एंट्री बंद थी। श्रद्धालुओं के रेले में कुछ कमी आई। पहले से सरकुलेटिंग एरिया में मौजूद श्रद्धालुओं को यहां से प्लेटफार्म तक ले जाने तथा प्लेटफार्म से बाहर निकलने के लिए पुल को दो हिस्से में बांटा गया था। इसके लिए पुलिस कर्मियों ने अपना डंडा जोड़कर श्रंखला बनाई। एक-दो घंटे बाद यह दूरी बढ़ गई। सुबह जहां प्रत्येक पुल पर पचास पुलिस कर्मी थे वहीं दोपहर तक दस के आसपास बचे। अपराह्न तीन बजे तक पुल के दोनों छोरों पर एक-एक पुलिस कर्मी ही बचे थे जो केवल सीटी बजाते दिखाई पड़े।