Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Feb 11, 2013 - 21:00:03 PM


Title - साठ साल बाद कुंभ पर दोबारा लगा बदनुमा दाग
Posted by : RailXpert on Feb 11, 2013 - 21:00:03 PM

मौनी अमावस्या को संगम में डुबकी लगाकर लौटते समय इलाहाबाद जंक्शन पर हुए हादसे के साथ बीते साठ वर्ष पहले का इतिहास दोहराया गया, जब दोबारा भगदड़ से चौबीस लोगों की मौत हो गई। वर्ष 1954 के कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के स्नानपर्व पर तीन फरवरी को हुई भगदड़ में तकरीबन आठ सौ श्रद्धालुओं की मौत हुई थी।

उस हादसे के बाद से अब तक इलाहाबाद में भगदड़ जैसी स्थितियों की पुनरावृत्ति नहीं हुई थी। रविवार को भी करोड़ों की भीड़ के बावजूद मेले में ऐसी घटना नहीं हुई लेकिन वापसी में रेलवे जंक्शन के हादसे ने मौजूदा कुंभ मेले को भी कलंकित कर दिया।

शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पर्व के सकुशल बीतने के बाद ऐसे हादसे ने पर्व पर दाग लगा दिया है। मुझे याद है वर्ष 1954 के हादसे में भगदड़ के बाद मैं स्वयं भीड़ के ऊपर-ऊपर से होकर संगम तट से त्रिवेणी बांध तक पहुंच पाया था। भीड़ और भगदड़ के बाद तमाम लोग जान बचाने के लिए बिजली के तार पर भी चढ़ें।

मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसे रेलवे प्रशासन की लापरवाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि रेल प्रशासन को कुंभ मेला प्रशासन से उचित तालमेल करते हुए भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए था। अब सभी घायलों का उचित और बेहतर इलाज हो। 

बता दें तब कुंभ में नेहरू सहित कई बड़े नेता शामिल हुए थे। इसमें चार से पांच लाख श्रद्धालु भी जुटे थे। हादसे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने न्यायमूर्ति कमलाकांत वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया गया था, कमेटी को हादसे के कारणों और भविष्य में इसे रोकने के उपायों से संबंधित रिपोर्ट देने को कहा गया था।