Indian Railways News => Topic started by sushil on Jul 04, 2012 - 09:00:57 AM


Title - नहीं सुलझी संदेहों की गुत्थी
Posted by : sushil on Jul 04, 2012 - 09:00:57 AM

अंग्रेज हुकूमत के समय रेलवे सेतु की सुरक्षा महत्वपूर्ण रही है. रेल प्रशासन के साथ स्थानीय पुलिस रेल व सड़क सेतु के सुरक्षा को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहे है. कोशी रेल ब्रिज पर संबंधित रेल कर्मी और सुरक्षा बलों को छोड़ आम लोगों का पुल पर आवागमन करना दंडणीय अपराध माना गया है.
वैसे भी रेल ब्रिज से गुजरना खतरों से खाली नहीं है. रेल सेतु पर कारतुस और रॉकेट लांचर के अग्रभाग का मिलने से संदेहों और संभावनाओं के कई तर्क सामने आ रहे हैं. जिसका कोई पुख्ता आधार और साक्ष्य नहीं मिल सका है.
रेल पुलिस व स्थानीय पुलिस का बारिकी अनुसंधान मामले की गुत्थी सुलझाने में जूटी हुई है. रेल सेतु के सुरक्षा पर भले ही रख छोड़े गये सामानों से खतरे की स्थिति नहीं हुई हो, मगर तर्क वितर्क की संदेहपूर्ण बातों से सेतु के चाक-चौबंद सुरक्षा को अपनाने की ओर सतर्क जरूर किया है.
नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सेतु सुरक्षा के लिये मामूली बातों को नजर अंदाज करना लाजमी नहीं है. माओवादी संगठन भय पैदा करने व वजूद दिखाने के लिये कई तरह के राष्ट्र विरोधी हरकतों को अपनाते आये हैं.
इस प्रकरण में जो दो तरह की बाते सामने आयी है. उनमें प्रथम यह संभावना जताई गयी है कि सेना के लोगों ने ट्रेन से कारतुस व आरएल से जूड़े भाग को बोरी में रख नदी में फेंका होगा. दूसरी बातों के संभावनाओं में असमाजिक तत्वों के लोगों द्वारा बोरी को पुल पर रखने की बातें आयी है.
संदेह के दोनों ही स्थितियों में उद्देश्य के पिछे तात्पर्य की गुत्थी पैदा करती है. इस स्थितियों में गुत्थी का सुलझ पाना आसाना नहीं रह जाता है. हालांकि पुलिस की सक्रियता पूर्वक माओवादियों विरुद्ध की गयी कार्रवाइयां नक्सलियों के हौसले पस्त करने की कार्य करती रही है.
बावजूद उसके स्थिति को कमजोर समझना सुरक्षा दृष्टिकोण से उचित नहीं है. कुरसेला कोशी रेल व सड़क सेतु कटिहार-भागलपुर जिले के क्षेत्र के समीपस्थ है. कोशी नदी का दियरा क्षेत्र के करीब होने से कोशी सेतु सुरक्षा के दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं. इन स्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था की थोड़ी सी लापरवाही और चूक असुरक्षा की स्थितियां पैदा कर सकती है.