Indian Railways News => Topic started by ConfirmTicket on Feb 03, 2013 - 09:00:39 AM


Title - ..एतिहासिक पल का गवाह बनी दो फरवरी
Posted by : ConfirmTicket on Feb 03, 2013 - 09:00:39 AM

तारीख दो फरवरी, दिन शनिवार। ये वो तारीख है जब जिले का सबसे बड़ा और सबसे पुराना ख्वाब पूरा होने की उम्मीदें बढ़ गई। क्योंकि दो फरवरी को बड़ी लाइन के आमान परिवर्तन का शूुभारंभ होने जा रहा था। एक नहीं दो-दो केंद्रीय मंत्री शनिवार की दोपहर बाद जब रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रेन से उतरे तो भारी भीड़ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खीरी सांसद ने दोनो ही नेताओं को हाथों हाथ लिया। ढोल और नगाड़े की आवाज के साथ कार्यकर्ताओं से घिरे नेताओं का काफिला जैसे ही मंच की ओर बढ़ा तो लोगों को ये उम्मीद भी साफ नजर आने लगी कि लगता है कि अब बड़ी लाइन में कोई भी कनफ्यूजन नहीं है। नजारा भी कुछ इसी तरह की गवाही दे रहा था।अब इसे सियासी लालीपाप कहें या फिर दशक दर दशक से रुके पड़े विकास के पहिए की रफ्तार में तेजी कि पहले फ्लाई ओवर और अब ब्राडगेज का शुभारंभ लोगों के सामने था। मंत्रियों के आने के पहले पूरे पंडाल में लोग तरह- तरह की चर्चाएं करने में मशगूल थे। कोई इसे चुनावी स्टंट बता रहा था तो कोई इसे वाहवाही लूटने का जरिया तो उसी भीड़ में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जो इसके तार सीधे जिले के विकास से जोड़ कर देख रहे थे। देर आए दुरुस्त आए ही सही लेकिन साल 2013 की शुरुआत में ही जिले को मिले इस शानदार तोहफे से राहत की सांस तो एक बारगी सभी ने ही ली। बड़े और बूढ़े ही नहीं बच्चे भी इस बात से गैरवाकिब नहीं थे कि बड़ी लाइन से वो भी अपने किसी भी रिश्तेदार के यहां किसी भी मैट्रो शहर में आसानी से आ-जा सकेंगे। वक्त करीब सवा चार बजे मंच पूरी तरह से भरा हुआ था। मंत्रियों और सांसद के चेहरे पर खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी। भारी भीड़ भी नेताओं का इस्तकबाल करने में जुटी थी। व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग भी केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देने की कतार में था। सभी की जुबान पर आभार के साथ ही ये सवाल भी था कि अब ये काम रुकने न पाए। समारोह शुरू हो चुका था। इसी के साथ उन लोगों का इंतजार भी खत्म हो गया जो सुबह से मंत्रियों की झलक और अपने जिले के एतिहासिक विकास के पल के गवाह बनने को घंटो पहले ही आ गए थे।

इनसेट - मंत्री जी आ गए लेकिन परी न हुई तैयारियां

सवाल एक नहीं दो-दो केंद्रीय मंत्रियों के रेलवे स्टेशन पर आने का था। अफसरों के हाथ-पांव फलनू तो लाजमी थे। वक्त कम था और तैयारियों की लंबी लिस्ट अफसरों के आगे मुंह बाए खड़ी थी। रात भी इन तैयारियों के लिए छोटी पड़ गई। स्टेशन को चमकाने का जिम्मेदारी एक नहीं तमाम पेंटरों की थी वो मंत्रीजी के आने से ऐन पहले तक जुटें भी रहे लेकिन पूरे स्टेशन को चमका नहीं पाए। इसी तरह गंदगी को छिपाने के लिए चूना तो बड़ी मात्रा में डाला गया लेकिन फिर गंदगी छिप नहीं सकी।