Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Dec 29, 2012 - 12:00:21 PM


Title - 'गरीब' का 'रथ' बना मुसीबत
Posted by : nikhilndls on Dec 29, 2012 - 12:00:21 PM

भागलपुर : सिल्क सिटी से नई दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन तक दौड़ता गरीबों का रथ मुसीबत बन चुका है। बुजुर्गो, महिलाओं को हाड़ कंपाती ठंड में खून के आंसू रुला रहा है। शायद सही समझे आप! बात 22405 अप गरीब रथ एक्सप्रेस की ही हो रही है। ट्रेन की बर्थे म्यूजिकल चेयर बन चुकी हैं। यह शायद देश की अकेली ऐसी ट्रेन है जो अभी भी नब्बे बर्थो (साइड मिडिल बर्थ) वाली बोगियों को ढो रही है। जबकि अन्य ट्रेनें इन बोगियों से 2008 में ही निजात पा चुकी हैं। यात्रियों के लिए नासूर बन चुकी इस समस्या का हल रेलवे के पास शायद नहीं है। उसे तो बस फिक्र किराया बढ़ाने की है। सेवाकर के नाम पर ऐसा हो भी चुका है।

जानकारी के अनुसार गरीब रथ का एक ही रैक है। यही रैक सप्ताह में तीन-तीन बार भागलपुर से आनंद विहार के बीच दौड़ता है। रेलवे ने चार माह पूर्व टिकट आरक्षित कराने की सुविधा दे रखी है। लोग इसका लाभ भी उठा रहे हैं। मगर, दुर्भाग्य से चार माह पूर्व शान से इस ट्रेन की लोअर बर्थ आरक्षित कराने वाले यात्री ट्रेन में पहुंचते ही खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। क्योंकि इस ट्रेन में आरक्षण तो 80 बर्थो के हिसाब से मिलता है जबकि ट्रेन की बोगी 90 बर्थ की होती है। ऐसे में लोअर बर्थ वाले यात्रियों की बर्थ अपर हो जाना आम बात है। सर्वाधिक कष्टप्रद स्थिति उस वक्त होती है जब वृद्ध, मरीज, गर्भवती महिलाओं की बर्थ बदल जाती है। खास बात यह कि ट्रेन में सर्वाधिक बर्थ पटना व इसके आसपास के शहरों से भरती हैं। इन स्थानों से ट्रेन में चढ़ने वाले ऐसे यात्री जिनकी बर्थ अपर होती है ट्रेन में लोअर बर्थ वाले हो जाते हैं। सफर के दौरान वे कतई बर्थ छोड़ना नहीं चाहते। क्योंकि उनकी तो अनायास ही लॉटरी ही लग जाती है। यह कोई एक दिन की बात नहीं, ट्रेन के हर फेरे में यात्री ऐसी मुसीबत झेल रहे हैं।

बीते 18 दिसंबर को भागलपुर से रवाना हुई इस ट्रेन में सफर के दौरान इस तरह के नजारे आम दिखे। ट्रेन में जमालपुर से चढ़े 80 वर्षीय जोड़े की दोनों लोअर बर्थे साइड अपर व साइड मिडिल बर्थो में बदल गई। पटना से चढ़े युवा जोड़े की मिडिल व अपर बर्थे लोअर बर्थे हो गई। वृद्ध दंपति अपनी स्थिति बताकर गिड़गिड़ाता रहा, युवा जोड़ा टस से मस न हुआ। इसी तरह की परेशानी भागलपुर से छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे दंपति, बीमार अधेड़ को उठानी पड़ी। हद तो तब हो गई जब बक्सर से चढ़ी दो महिलाओं की लोअर बर्थे तो गई ही, उनकी बोगियां भी अलग-अलग हो गई। मगर, ट्रेन में टीटीई से लेकर यात्रियों तक कोई भी नहीं पसीजा। सभी परिस्थिति की दुहाई देते रहे। इन यात्रियों का कहना था, यदि रेलवे को यही बोगियां चलानी हैं तो कम से कम आरक्षण तो इन्हीं सीटों के हिसाब से दे।

गौरतलब है कि मार्च 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने स्लीपर व एसी थ्री बोगियों में 72 की जगह 90 सीट करने का आदेश दिया था। यात्रियों को होने वाली परेशानी को देखते हुए रेलवे ने 2008 में यह आदेश वापस ले लिया था। मगर, नॉर्दन रेलवे यह व्यवस्था अब तक जारी रखे है। गरीब रथ नॉर्दन रेलवे की ट्रेन है। यही वजह है नई दिल्ली से भागलपुर आने वाले यात्रियों को इस तरह की परेशानियां कम झेलनी पड़ती हैं।

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बाक्स

स्थानीय रेलवे प्रबंधन उवाच

गरीब रथ का रखरखाव दिल्ली में होता है। वहां काफी समय मिलता है। टीटीई की ओर से बुकिंग में मेमो दिया जाता है, जिसके आधार पर चार्ट तैयार होता है। मेमो में आरएसी वालों के लिए खाली सीटो के नंबर रहते हैं। इस कारण उधर से आने पर पहले से सीट बुक कराने वालों को वही सीटे मिलती हैं जो उनके नाम से बुक होती हैं। भागलपुर में यह ट्रेन डेढ़ से दो घंटे ही खड़ी होती है। इस कारण यहां बुकिंग कार्यालय 90 सीटों के आधार पर चार्ट तैयार करता है। इससे सीटें बदल रही हैं।

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आरक्षण काउंटर के कर्मचारी की जुबानी

डाटा बेस में सही फीडिंग न होने के कारण ऐसा हो रहा है। इसे रेलवे मुख्यालय ही सुधार सकता है।

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कैरेज एंड वैगन विभाग के अधिकारियों का कथन

गरीब रथ से 90 सीटों की बोगियां हटाने के लिए कई बार नॉर्दन रेलवे को कहा गया है। मगर, वहां से बोगियां हटाई नहीं जा रही हैं। ऐसी व्यवस्था सिर्फ गरीब रथ में ही है। आय कम होने के कारण ट्रेन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ट्रेन की बोगियां भी पुरानी हैं।

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कोट-

बोगी के अंदर यात्रियों की बर्थे बदल जाने की जानकारी मुझे नहीं है। अब सूचना मिली है। इसकी जांच की जाएगी। कार्रवाई के लिए नॉर्दन रेलवे को लिखा जाएगा।

रवींद्र गुप्ता, डीआरएम, मालदा रेल मंडल