Indian Railways News => Topic started by greatindian on Feb 02, 2013 - 15:00:54 PM


Title - पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र हत्याकांड की गुत्थियां 37 वर्षो बाद भी नहीं सुलझ पाई
Posted by : greatindian on Feb 02, 2013 - 15:00:54 PM

पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र हत्याकांड की गुत्थियां 37 वर्षो बाद भी नहीं सुलझ पाई है। इस पूरे घटनाक्रम का मूक किंतु चश्मदीद गवाह है, समस्तीपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर चार और पांच। दो जनवरी 1975 को समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर बड़ी लाइन के उदघाटन के अवसर पर बम विस्फोट में वे बुरी तरह से घायल हो गए थे। तीन को उनकी मौत हो गई थी। 24 जनवरी 75 को पटना में विशेष न्यायायिक दंडाधिकारी की अदालत में चार्जशीट दाखिल हुई, और चार साल तक यहां सुनवाई हुई। फेयर ट्राइल की मांग पर 17 दिसंबर 1979 को सर्वोच्च न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के लिए केस दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित कर दिया। फिर 1981 में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का दरवाजा खटखटाया गया। इसके तीन आरोपियों रामकुमार, रामाश्रय व विनयानंद की अनुपस्थिति में उन्हें फरार घोषित कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बचाव पक्ष के चार वकील भी स्वर्ग सिधार चुके हैं। अब तक इस मामले में 17 जजों ने सुनवाई की है। 151 गवाहों की गवाही पेश की जा चुकी है। इस बेहद संवेदनशील मामले के केस की फाइल दस हजार पृष्ठों से अधिक की हो चुकी है।