Indian Railways News => Topic started by Jitendar on Sep 09, 2012 - 12:00:16 PM


Title - किसान-मजदूर जत्थेबंदियों ने रेल आवाजाई ठप्प करके किया रोष प्रदर्शन
Posted by : Jitendar on Sep 09, 2012 - 12:00:16 PM

मोगा। पंजाब की 17 किसान मजदूर जत्थेबंदियों के प्रदेश स्तरीय आह्वान पर बुधवार को जिला मोगा के किसानों, मजदूर जत्थेबंदियों द्वारा मोगा रेलवे स्टेशन पर दोपहर साढ़े 12 बजे से साढ़े तीन बजे तक रेल आवाजाई ठप्प की। इस दौरान किसानों ने रोष प्रदर्शन करके नारेबाजी भी की। इस मौके जिले भर से सैकड़े किसानों, मजदूरों व महिलाओं ने शमूलियत की।धरने को संबोधित करते जिला प्रधान दविंदर सिंह घाली, प्रदेश कमेटी मेंबर निर्मलजीत सिंह, ब्लाक मोगा-2 के प्रधान प्रगट सिंह साफूवाला, भारतीय किसान यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी, जिला प्रधान त्रिलोक सिंह हिम्मतपुरा, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के जिला नेता छिंदर सिंह नत्थूवाला, प्रदेश नेता गुरदीप सिंह वैरोके, भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रदेश नेता निर्मल सिंह, ग्र्रामीण मजदूर यूनियन के जिला प्रधान मेघा सिंह तखानवध, पंजाब खेत मजदूर यूनियन के जिला प्रधान मेजर सिंह कालेके, ग्र्रामीण मजदूर यूनियन मशाल के प्रदेश नेता बलदेव सिंह रसूलपुर, जिला नेता गिंदर सिंह रोडे ने केन्द्र सरकार की लोक विरोधी नीतियों की सख्त शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि केन्द्र की सरकार का भ्रष्टाचार दिननों दिन नए रूप में प्रकट हो रहा है। जिसकी ताजा उदाहरण 1.86 लाख करोड़ का कोयला घोटाला है। जो लोगों पर टैक्स के रूप में एकत्रित पैसा कैसे निजी कंपनियों को लूटा जा रहा है। दूसरे तरफ पंजाब सरकार ने 1 हजार करोड़ के नए टैक्स लगाकर लोगों की लूट के लिए रास्ता स्तर कर लिया और सरमाएदारी नीतियों की पढ़ोता की है जो कि अति अंत निंदनीय है। इन लोक विरोधी नीतियों पर नकेल डालने के लिए ही आज रेल रोको का प्रोग्र्राम सरकार को सिर्फ संकेतक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन नीतियों को वापस नहीं लेती तो 17 किसान मजदूर जत्थेबंदियां संघर्ष को और तीव्र करेंगी। जिसकी जिम्मेवार केन्द्र व पंजाब सरकार होगी। धरने दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया एवं मांग की कि केन्द्र सरकार पंजाब को सूखा राहत राज्य ऐलान किया जाए, पंजाब के समूह धान उत्पादकों किसानों को 10 हजार रुपये, सूख चुके धान क्षतिग्र्रस्त करने के लिए मजबूर हुए किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, खेती पर निर्भर मजदूरों को प्रति परिवार मुआवजा दिया जाए, खेती सेक्टर को 16 घंटे एवं घरेलू बिजली 24 घंटे निर्विघ्न सप्लाई चालू की जाए, खेती मोटरों के लिए लोड 1.5 एम पीयर से बढ़ाकर 2.5 एम पीयर प्रति पावर किया जाए, किसानों, मजदूरों की किश्त स्थगित की जाए, छोटे किसानों को खेती के लिए डीजल पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए, किसान संघर्ष दौरान दर्ज झूठे केस वापस लिए जाए, पंजाब सरकार द्वारा किए वायदे अनुसार लागू किए जाए, जबरी जमीन एक्वायर करने का नोटीफिकेशन रद्द किया जाए, जमीनें वापस की जाए, मजदूरों के घरेलू बिलों के बकाए खत्म किए जाए, घर बनाने के लिए 10-10 मरलें के प्लाट दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांगों की तरफ ध्यान न दिया तो संघर्ष को और तीव्र किया जाएगा।