Indian Railways News => Topic started by nikhilndls on Sep 22, 2012 - 15:00:19 PM


Title - जहरखुरानी का शिकार बना दंपति
Posted by : nikhilndls on Sep 22, 2012 - 15:00:19 PM

झांसी। रेलवे प्लेटफार्म पर बदमाशों ने एक दंपति को जहरखुरानी का शिकार बना लिया। दोनों अचेत हालत में प्लेटफार्म पर पड़े पाए गए। उन्हें मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया, जहां देर रात तक उन्हें होश नहीं आया था।बृहस्पतिवार की शाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 1/7 (कानपुर साइडिंग की तरफ) बने मठ्ठा स्टाल के पास पैंट शर्ट पहने पैंतालिस वर्षीय एक व्यक्ति व चालीस वर्षीय महिला अचेत हालत में पड़े पाए गए। यात्रियों की सूचना पर आरपीएफ, जीआरपी व रेलवे चिकित्सक डा प्रतीक श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। चिकित्सक ने दोनों की हालत देखकर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। दोनों के मुंह से झाग निकल रहा था। पूछताछ में स्टाल पर तैनात एक कर्मी ने बताया कि दोनों सामान के साथ दो तीन घंटे से बैठे थे। दोनों यात्रियों का सामान लापता था। इससे अनुमान लगाया गया कि दोनों के साथ जहरखुरानी की वारदात हुई है।

पूछताछ कार्यालय का हाल बुरा झांसी। रेलवे पूछताछ कार्यालय का हाल बुरा है। पट्टिकाओं से नाम मिटने के कारण ट्रेनों के बारे में स्केच पैन से लिखना पड़ रहा है। लिंक ट्रेनों का भी सही लोकेशन नहीं मिल पा रहा है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। गौरतलब है कि रेलवे स्टेशन मुख्यालय पर चाहे मंडल के किसी अफसर का निरीक्षण हो, वह पूछताछ कार्यालय में यात्री सुविधाओं का जायजा लेने अवश्य जाता है। लेकिन यहां की व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। ट्रेनों की जानकारी के लिए इंक्वायरी ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड पर ट्रेनों के नाम, नंबर व टाइम को प्रदर्शित करने के लिए प्रत्येक गाड़ी की बनाई गई पट्टिका लगाई जाती है। अनेक पट्टिकाओं की लिखाई मिट गई है। ऐसे में कर्मचारियों को पट्टिकाओं पर स्केच पैन से लिखना पड़ रहा है। पट्टिका से नाम मिटने वाली गाड़ियों में 12001 डाउन शताब्दी एक्सप्रेस, 11078 अप झेलम एक्सप्रेस, 14020 कान्हावेली एक्सप्रेस, 19666 उदयपुर खजुराहो एक्सप्रेस, 22403 पांडेचरी नई दिल्ली एक्सप्रेस आदि शामिल हैं। कांच के बाहर खड़े यात्रियों को स्केच से लिखी इन गाड़ियों की पोजीशन पता करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह प्लेटफार्म पर आने वाली लिंक ट्रेनों को तलाशना भी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

नई दिल्ली से चलकर आने वाली गोंडवाना एक्सप्रेस का आधा रैक बीना से जबलपुर व आधा नागपुर के लिए जाता है। ट्रेन के आने पर अनारक्षित यात्रियों को पता ही नहीं चलता कि कौन सा रैक जबलपुर और कौन सा नागपुर जाएगा। अक्सर जानकारी के अभाव में यात्री गलत कोच में बैठ जाते हैं। यही समस्या लोकमान्य तिलक से गोरखपुर जाने वाली 11015 कुशीनगर एक्सप्रेस की है। इस ट्रेन में इटारसी स्टेशन से एक डिब्बा पंचवली एक्सप्रेस का लगकर आता है। ट्रेन के आने पर यात्रियों को उक्त कोच का पता कर पाना बेहद मुश्किल भरा हो जाता है।