| Indian Railways News => | Topic started by Mafia on May 05, 2013 - 08:00:13 AM |
Title - प्रतिद्वंद्वियों की चाल से सीबीआई के जाल में फंसे महेश कुमारPosted by : Mafia on May 05, 2013 - 08:00:13 AM |
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मुबंई [ओमप्रकाश तिवारी]। शुक्रवार को देर रात सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार की निगाहें कुछ माह बाद खाली हो रहे रेलवे बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी पर थीं। कहा जा रहा है कि इस कुर्सी के दूसरे दावेदारों की साजिश ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। बताया जाता है कि 30 जून को खाली हो रहे इस पद के लिए रेलवे बोर्ड के एक वर्तमान सदस्य सहित कुछ और दावेदार भी थे। इनमें से दो व्यक्ति महेश कुमार से वरिष्ठ थे। महेश कुमार अपने अब तक के शानदार रिकॉर्ड और रेल मंत्री के निकट संबंधियों से अपनी करीबी के कारण अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार बनकर उभर रहे थे। लेकिन इस पद तक पहुंचने का रास्ता रेल बोर्ड की सदस्यता से होकर जाता है। इसलिए उन्हें फिलहाल कुछ समय के लिए सदस्य [स्टाफ] बनाकर बोर्ड में लाया गया। सूत्रों के अनुसार ऐसे पदों पर होने वाली नियुक्तियां बिना लेनदेन के नहीं होतीं, यह जानते हुए अध्यक्ष पद के अन्य दावेदारों में से किसी ने सीबीआई को यह सुराग दे दिया । जिसके आधार पर सीबीआई ने टेलीफोन टैपिंग का जाल बिछाकर महेश कुमार, विजय सिंगला, संदीप गोयल और मंजुनाथ इत्यादि को धर दबोचा। पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक जैसे महलवपूर्ण पद पर रहते हुए महेश कुमार ने रेल बोर्ड की सदस्यता के लिए मंजुनाथ नामक व्यक्ति को लेनदेन की जिम्मेदारी सौंपी। मंजुनाथ उस समय से महेश कुमार के संपर्क में है, जब वह बेंगलूर में मंडल रेल प्रबंधक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बताया जाता है कि मंजुनाथ रेल पटरियों के किनारे लगाए जाने वाले एक्सेल काउंटर बनाने का काम करता है और महेश कुमार की निकटता के कारण उसे अपना व्यवसाय चमकाने में मदद मिली है। रेल विभाग की बहुकरोड़ीय योजनाओं पर नजर रखते हुए ही उसने महेश कुमार को आगे बढ़ाने के लिए उस लेनदेन का जिम्मा संभाला, जिसमें उसके साथ-साथ महेश कुमार और रेलमंत्री के भांजे विजय सिंगला भी सीबीआई के फंदे में आ गए हैं। पहले फोटो छपवाया, फिर चेहरा छिपाया |