Indian Railways News => Topic started by RailXpert on Jul 30, 2012 - 06:19:15 AM


Title - यात्रियों से एक रुपये कमाने के लिए 1.71 रुपये का खर्च
Posted by : RailXpert on Jul 30, 2012 - 06:19:15 AM

फिरोजपुर डिवीजन में ट्रेनों में फूंकता 365 करोड़ का डीजल व 35 करोड़ की बिजली
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फिरोजपुर। डीजल की बढ़ रही कीमतों के बाद भी रेल किराये में बढ़ोतरी नहीं किए जाने से रेलवे को एक रुपये कमाने के लिए एक रुपए 71 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। केवल फिरोजपुर डिवीजन में डीजल के दम पर दौड़ने वाली ट्रेनों में प्रति वर्ष लगभग 365 करोड़ का डीजल जलता है, जबकि बिजली से चलने वाली ट्रेनों का प्रति वर्ष तकरीबन 35 करोड़ की बिजली खर्च होती है।रेल अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक दशक से रेल किराये में वृद्धि नहीं की गई है, जबकि डीजल के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। बसों के दाम ट्रेन की तुलना में दस गुना से अधिक बढ़ गए हैं। बताते हैं कि रेलवे को यात्रियों से एक रुपये कमाने के लिए एक रुपए 71 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसीलिए रेलवे की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। इस बार तो डिवीजन को एक साथ पूरे साल का बजट तक नहीं दिया गया। हर माह खर्च के लिए दिल्ली से ग्रांट भेजी जा रही है। जिससे रेलकर्मियों की तनख्वाह और अन्य खर्च हो रहे हैं। बताते हैं कि हर साल रेलकर्मियों के डीए, इंक्रीमेंट व अन्य खर्च बढ़ रहे हैं। इनको पूरा करने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं। रेलवे के पास कमाई के लिए सिर्फ एक साधन, जमीन ही बची है। डा. अनिल काकोदकर की कमेटी ने जमीन से 20 करोड़ व सैम पित्रोदा की कमेटी ने 50 करोड़ कमाने की सलाह दी है।रेल अधिकारियों का कहना है कि अब डीजल के दाम में हो रही बढ़ोतरी से रेलवे पर और करोड़ों रुपये का बोझ पड़ेगा। जिससे रेलवे की आर्थिक स्थिति डगमगाएगी।