Indian Railways News => Topic started by railgenie on Apr 30, 2013 - 18:00:42 PM


Title - हाई स्पीड ट्रेन: अभी तक कंपनी का गठन ही नहीं हुआ
Posted by : railgenie on Apr 30, 2013 - 18:00:42 PM

जागरण संवाददाता, मेरठ : मेरठ से दिल्ली हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। सवा दो साल पहले इस प्रोजेक्ट को लांच करने के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल दिल्ली, उप्र, राजस्थान और हरियाणा के शहरों केसाथ समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। उप्र की ओर से तत्कालीन कमिश्नर भुवनेश कुमार ने हस्ताक्षर किए थे। सवा दो साल बीतने को हैं पर अभी तक प्रोजेक्ट को संचालित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) का गठन नहीं हो पाया है।
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद शरद यादव के नेतृत्व में बनी शहरी विकास विभाग की स्थायी समिति ने हाल ही में वर्ष 2012-13 की रिपोर्ट सदन में रखी तो पता चला कि अभी तक मेरठ-दिल्ली समेत तीन हाईस्पीड प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए कंपनी का गठन ही नहीं हुआ। सवा दो साल पहले उप्र ने अपने हिस्से का 2800 करोड़ जमा कराने का भरोसा दिलाया था, पर अभी तक एक पैसा भी जमा नही हुआ। एमडीए, नगर निगम मेरठ, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और नगर निगम गाजियाबाद को इस 2800 करोड़ का साढ़े बारह प्रतिशत जमा कराना था, उनकी ओर से जमा भी शून्य है। मेरठ व गाजियाबाद में इस प्रोजेक्ट के लिए 640 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण हेतु चिन्हित हुई, पर उसे अभी तक महायोजना में चिन्हित नहीं किया गया।
ये है प्रोजेक्ट
-रैपिड रेल ट्रांज़िट सर्विस के तहत दिल्ली के निजामुद्दीन से गाजियाबाद होते हुए मेरठ तक 32 मिनट में यात्रा पूरी कराने के लिए करीब 15 हजार करोड़ का यह प्रोजेक्ट है।
-मेरठ में भूड़बराल, जागरण चौराहा, एचआरएस चौक बागपत चौराहा, बेगमपुल, कंपनी बाग, नौचंदी मैदान, शास्त्री नगर, मेडिकल कालेज के पास, गढ़ रोड, पल्लवपुरम में स्टेशन व सिवाया में डिपो बनना है।
-गाजियाबाद में मोदीनगर, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर, गाजियाबाद, मोहन नगर व साहिबाबाद स्टेशन व डिपो बनेगा। दिल्ली में आनंद विहार सराय काले खां व निजामुद्दीन में स्टेशन बनेंगे।
-90 किमी के ट्रैक में 62 किमी ट्रैक ऐलीवेटर व 28 किमी भूमिगत होगा। भूमिगत ट्रैक मेरठ में ही होगा।
ये बोले कमिश्नर एमके नारायण
इस प्रोजेक्ट के लिए उप्र का शेयर केंद्रीय शहर विकास मंत्रालय को जमा कराने के लिए शासन स्तर पर सहमति हो चुकी है। धनराशि के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र प्लानिंग बोर्ड से ऋण लेने पर भी स्वीकृति जारी हो चुकी है। प्रथम चरण में 220 करोड़ कंपनी गठन के दौरान जमा होना है। बाद में यदि यह प्रोजेक्ट प्राइवेट पब्लिक पार्टनर शिप अन्तर्गत लांच होता है तो 14780 करोड़ ठेका लेने वाली कंपनी जमा कराएगी।